अजब गजब ये काफल

गर्मी,पहाड़ी और फल ये सब सोचते हुए जो सबसे पहले दिमाग में नाम आता है वो है काफल | अगर आप उत्तराखंड से है तो ये मुमकिन ही नहीं है के आपने काफल ना खाया हो और अगर आप देवभूमि गए और आपने वहां जाकर काफल नहीं खाया तो समझिये आपकी यात्रा अधूरी है|
काफल एक जंगली फल है जिसे उगाया नहीं जाता बल्कि ये अपने आप उगता है| काफल खाने में बहुत ही मीठा और स्वादिष्ट होता है|
कहते हैं कि काफल को अपने ऊपर बेहद नाज भी है और वह खुद को देवताओं के खाने योग्य समझता है. कुमाऊंनी भाषा के एक लोक गीत में तो काफल अपना दर्द बयान करते हुए कहते हैं, 'खाणा लायक इंद्र का, हम छियां भूलोक आई पणां. इसका अर्थ है कि हम स्वर्ग लोक में इंद्र देवता के खाने योग्य थे और अब भू लोक में आ गए.'
स्वाद के साथ साथ काफल शरीर के लिए भी बहुत लाभदायक है:
1) इसका फल अत्यधिक रस-युक्त और पाचक जूस से भरा होता है। ऐसे में ये पेट से जुड़ी कई बीमारियों को सही करने का काम करता है।
2) इस फल को खाने से पेट के कई प्रकार के विकार दूर होते हैं। जैसे अतिसार, अल्सर, गैस,कब्ज, एसिडीटी आदि।
3) मानसिक बीमारियों समेत कई प्रकार के रोगों के लिए काफल काम आता है, क्योंकि ये कई तरह के एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी डिप्रेशंट तत्वों से भरा होता है।
4) इसके तने की छाल का सार, अदरक तथा दालचीनी का मिश्रण अस्थमा, डायरिया, बुखार, टाइफाइड, पेचिश तथा फेफड़े ग्रस्त बीमारियों के लिए अत्यधिक उपयोगी है।
खास बात है कि इतनी उपयोगिता के बावजूद काफल बाहर के लोगों को खाने के लिए नहीं मिल पाता। दरअसल, काफल ज्यादा देर तक रखने पर खाने योग्य नहीं रहता। यही वजह है उत्तराखंड के अन्य फल जहां आसानी से दूसरे राज्यों में भेजे जाते हैं, वहीं काफल खाने के लिए लोगों को देवभूमि ही आना पड़ता है।

तो अगली बार जब आप देवभूमि आएं तो काफल जरूर खाएं|
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