इन जुल्फों का कहना ही क्या

आंखें वो जब नम हो जाएं।
आंसू फिर जमजम हो जाएं।।

इन जुल्फों का कहना ही क्या।
इन जुल्फों के खम हो जाएं।।

रिमझिम मौसम ये कहता है।
तू और मैं अब हम हो जाएं।।

उसकी मजबूरी को समझें।
नाहक क्यों बरहम हो जाएं।।

'दर्द' मजा है तब जीने का।
जख्मों का मरहम हो जाएं।।
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