वो पहाड़ियों की एक टोली

वो पहाड़ियों की एक टोली
थी मेरे ऑफिस में,

वो पहाड़ों की ठंडी हवा सी
वो नदियां की तरह मदमस्त बहती सी
और कभी छू लेना चाहती आसमान
उस पहाड़ की ऊँची चोटी सी
वो पहाड़ियों की एक टोली
थी मेरे ऑफिस में,

वो कभी एक साथ अपने गीत गुनगनाते,
वो संग हँसते मुस्कराते
और कभी रोते हुए को भी हंसा देते,
वो मेहनतकश लोगों की टोली 
वो दिल को छूने वाली
उनकी गढ़वाली बोली,
वो पहाड़ियों की एक टोली
थी मेरे ऑफिस में |
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