कुछ न कुछ तुम्हारी भी गलतियां रही होंगी।

कुछ न कुछ तुम्हारी भी गलतियां रही होंगी।
राख के ढेरों में चिंगारियां रही होंगी।।

बेसबब समंदर में जलजला नहीं आया।
प्यास से तड़पती कल मछलियां रही होंगी।।

मुल्क में तुम्हारे भी हो गई बगावत है।
फैसलों में हाकिम के खामियां रही होंगी।।

सांप आस्तीनों में यूं नहीं पनपते हैं।
कल यहां सपेरों की बस्तियां रही होंगी।।

होसले अंधेरों के इसलिए बढ़े होंगे।
ताक में दियों की कुछ आंधियां रही होंगी।।
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