जंगल-जंगल भटका होगा।

जंगल-जंगल भटका होगा।
खुद से शायद बिछड़ा होगा।।

साथ मेरे चलता रहता है।
मेरी मां का साया होगा।।

रब की तो रब ही जाने, पर।
मां का दर्जा आला होगा।।

झीने कपड़े पहने होंगे।
मौसम कितना अच्छा होगा।।

आंख से उसके खूं टपके है।
कानों से कुछ देखा होगा।।

क्या कुछ दिल पे बीती होगी।
क्या-क्या किसने बोला होगा।।

नींद उसे कब आई होगी।
रात गए घर लौटा होगा।।

महका-महका घर है सारा।
यार मेरा घर आया होगा।।

'दर्द' उसे कैसे समझाएं।
दुनिया से जो भागा होगा।।
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